भारतीयों की जड़ी-बूटियाँ काम कर गई तेजी से घटने लगे हैं अब कोरोना-वायरस के मामले। पेश है खास रिपोर्ट-

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नई दिल्ली : दोस्तों एक रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2019 में कोरोना-वायरस ने चीन में जन्म लिया था और यह पूरी दुनिया में फैल गया था जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सी गई थी। 
पिछले वर्ष भारत में केवल नवंबर माह में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 97894 केस देखने को मिले थे। वहीं फरवरी 2021 में Covid-19 के कुल केस मात्र 8635 रह गए।

जहां दुनियाभर में कोरोना-वायरस की थर्ड वेव तेजी से फैल रही थी वहीं भारत में कोरोना के मामले दिन प्रतिदिन गिरते चले गए। 
कई जानकारों ने बताया कि भारत में कोरोना की जांच समुचित तरीके से नहीं हो पा रही है इसलिए कोरोना मामलों के सही आकड़े नहीं मिल पा रहे हैं। 

लेकिन अन्य आंकड़ों के अनुसार अस्पतालों में आईसीयू के उपयोग में भारी गिरावट आई है जिससे यह स्पष्ट होता है कि कोरोना-वायरस के मामले वास्तव में कम हुए हैं।

वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के घटते मामलों के संबंध में अलग-अलग तथ्य प्रस्तुत किए हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि देश में होने वाला लॉक-डाउन कोरोना वायरस के नियंत्रण में बहुत सहायक रहा जबकि कुछ वैज्ञानिकों का तर्क है कि साफ-सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर आदि का समुचित प्रयोग कोरोनावायरस से जंग लड़ने में मील का पत्थर साबित हुआ।

कोरोना वायरस की चुनौतियों के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया तथा सरकार द्वारा तय किए गए सभी प्रोटोकॉल्स का सख्ती से पालन करवाया।

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इन सभी सुरक्षा उपायों के अलावा भारतीय लोगों ने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों जैसे तुलसी, गिलोय, नीम आदि का बखूबी प्रयोग किया। यही कारण रहा कि लोगों को होने वाले सामान्य सर्दी-जुखाम में भी गिरावट देखने को मिली।

एक अन्य थ्योरी के अनुसार भारत के गर्म और उष्ण वातावरण के कारण कोरोनावायरस यहां सरवाइव नहीं कर पाया जिसके फलस्वरूप भारत बहुत जल्द इस संकट से उबर पाया

अभी हाल ही में भारत सरकार ने को-वैक्सीन जैसी दर्जनों कोरोनावायरस से निपटने वाली वैक्सीन को लॉन्च कर दिया है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीनेशन की प्रक्रिया काफी तेजी से करने के कारण भी कोरोना केसेस में कमी देखने को मिल रही हैं।

कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार भारत पिछले कुछ दशकों में मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, कॉलरा जैसी  बीमारियों से जूझ रहा था। इन बीमारियों से लड़ते-लड़ते भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है। यही कारण रहा है कि भारतीयों में अनेकों बीमारियों के खिलाफ लड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज पाए जाते हैं जिससे कोरोना वायरस से लड़ने में भी सहायता मिली है।

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एक अन्य थ्योरी के अनुसार भारत की अधिकांश जनता युवा है। सर्वे में यह देखने को मिला कि कोरोना-वायरस मुख्य रूप से वृद्ध व्यक्तियों जिनकी उम्र 65 वर्ष या इससे से ऊपर की है,उन्हें अधिक प्रभावित करता है। वृद्धावस्था में मनुष्य कई बीमारियों से ग्रसित होते है ऐसी हालत में वह किसी भी वायरस की चपेट में आसानी से आ जाते हैं और उनका शरीर इन वायरस से लड़ने में सक्षम नहीं होता है इसलिए उनको वायरस की मार से स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है।

निष्कर्ष 
हालांकि कोरोना वायरस के मामले अब तेजी से घट रहे हैं परंतु फिर भी हमें अभी सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलते समय मास्क और सेनीटाइजर जरूर साथ रखना चाहिए और समय-समय पर इम्यूनिटी को बढ़ाने वाली औषधियों और फलों का प्रयोग करते रहना चाहिए। कोरोना के कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना चाहिए व समुचित उपचार करना चाहिए।



Disclaimer: इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है , हम किसी भी तथ्य के पूर्णतः सत्य या मिथ्या होने का दावा नहीं करते। दी गयी जानकारी का स्त्रोत विभिन्न पुस्तकें, स्वास्थ्य-सलाहकार व कुछ व्यक्तियों के अनुभव हैं, दर्शक कृपया स्व-विवेक से काम लें , किसी भी नुकसान के लिए हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं होगी, धन्यवाद।


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