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menturation cycle in hindi


प्रदर से पीड़ित स्त्री के योनी से अक्सर अधिक रक्त (खून) बहता रहता है। मासिक स्त्राव के बीच भी रक्त स्त्राव या रक्त प्रदर के लक्षण होते हैं। योनि से अधिक खून निकलने के कारण स्त्रियां कमजोर पड़ जाती हैं जिसकी वजह से उनको बहुत सारी स्वास्थ समस्याओं से जूझना पड़ता है।


रक्त प्रदर का कारण

इस रोग में कई कई दिनों तक रक्त योनि से बहता है गर्भपात कराने से भी यह रोग हो जाता है अभी चिंता, क्रोध, ईर्ष्या और शारीरिक क्षमता से अधिक मेहनत करने से भी रक्त प्रदर का रोग उत्पन्न हो जाता है।

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रक्त प्रदर के रोग के लक्षण

कमर दर्द, खून की कमी , शारीरिक कमजोरी, सिर में दर्द, चक्कर आना अधिक अधिक प्यास लगना तथा आंखों के आगे अंधेरा छाना आदि लक्षण रक्त प्रदर से पीड़ित महिला में दिखाई पड़ते हैं।


रक्त प्रदर के उपचार

  • आम की गुठली का १ से 2 ग्राम चूर्ण 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।
  • जवाकुसुम (गुड़हल )को 5-10 कलियों को दूध में मसल कर पिलाने से रक्त प्रदर में लाभ होगा।
  • कच्चे केलों को धूप में सुखाकर उसका चूर्ण बनाने लें, इसमें से 5 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम गुड़ मिलाकर स्त्री को खिलाने से रक्त प्रदर में लाभ होगा।

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विभिन्न औषधियों से उपचार

  • आंवला से रक्त प्रदर उपचार

10 ग्राम आंवले का रस 400 मिली मीटर पानी में डालकर काढ़ा बना लें इस काढ़े से योनि को करे ।

5 ग्राम की मात्रा में आंवला को पीसकर 3 ग्राम शहद के साथ मिलाकर दिन में 2बार सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ मिलता है।

25 ग्राम आंवले का चूर्ण 50 मिलीमीटर पानी में डालकर रख लें, सुबह उठकर उसमें जीरे का1 ग्राम चूर्ण और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से रक्त प्रदर ठीक हो जाता है।

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  • क्षीरी से रक्त प्रदर का उपचार

50 क्षीरी के पेड़ की छाल को400 मिली मीटर पानी में डालकर काढ़ा बनाकर पिचकारी से योनि साफ करें इससे रक्त प्रदर में लाभ मिलता है।

  • अडूसा से रक्त प्रदर का उपचार

अडूसा के पत्तों को रस में शहद मिलाकर पीने से खूनी प्रदर मिट जाता है ।

  • बबूल से रक्त प्रदर का उपचार

बबूल,राल, गोंद रसोत को 5-5 ग्राम लेकर कूट पीसकर चूर्ण बनाकर 5 ग्राम दूध के साथ रोजाना सेवन करें इससे रक्त प्रदर मिट जाता है।

  • चावल से रक्त प्रदर का उपचार

चावल के धोवन के पानी में ,5 ग्राम गेरू मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर मिट जाता है।

50 ग्राम चावलों को धोकर 100 मिली मीटर पानी में रखें 4 घंटो के बाद उन चावलों को उसी पानी में थोड़ा सा मसल छानकर पी लें इस प्रकार पीने से रक्त प्रदर मिट जाता है।

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सावधानी-

उपचार के दौरान आराम ना होने तक आहार में दूध और चावल ही लें, बुखार हो तो उन दिनों व्रत रखें।

यहां पर बताए गए प्रयोग व नुस्खों को चिकित्सक की सलाह अनुसार ही उपयोग करें। यहां दी गई समस्त जानकारी मात्र सूचना के उद्देश्य से है।


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